
वैश्विक AI कंप्यूटिंग पावर का 72% अमेरिका के पास है, जबकि भारत वैश्विक हिस्सेदारी के मामले में मात्र 1.6% पर है।
डेटा सेंटरों की बिजली खपत 2030 तक तेजी से बढ़ेगी, जिसमें अमेरिका और चीन का 80% योगदान होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए चिप निर्माण और पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौतियां हैं ताकि वह केवल विदेशी सिस्टम का होस्ट न बने।