अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत के प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए इसे ईसाइयों पर हमला बताया और द्विपक्षीय संबंधों पर असर की चेतावनी दी।
मूर के दावों को आयरलैंड स्थित 'कैथोलिक एरेना' जैसे संगठनों ने समर्थन दिया, जिसे भारत में विदेशी फंडिंग के जरिए अस्थिरता फैलाने वाले एजेंडे के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय यूजर्स ने इस विरोध को भारत की आंतरिक मामलों में दखलंदाजी कम करने की कोशिश करार दिया है, जिससे एनजीओ के माध्यम से होने वाली अरबों डॉलर की फंडिंग पर लगाम लगेगी।