वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे इंजेक्शन को पानी में घोलकर पिया जा सकेगा, जिससे सुई लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
यह नवाचार उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें नियमित रूप से दवाएं लेनी पड़ती हैं, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगी, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य मानकों में सुधार होगा।