
आरबीआई ने फ्लोटिंग रेट लोन के लिए नए ड्राफ्ट नियम पेश किए हैं, जिसके तहत 1 अप्रैल 2027 से सभी पर्सनल और MSME लोन को रेपो रेट जैसे एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य होगा।
नए नियमों के अनुसार, बैंक लोन की ब्याज दरें 3 महीने में एक बार से ज्यादा नहीं बदल सकेंगे और स्प्रेड को कम से कम 3 साल तक संशोधित नहीं किया जा सकेगा।
मौजूदा लोन ग्राहकों को 1 अप्रैल 2029 तक नए फ्रेमवर्क में शिफ्ट होना होगा, जिसके लिए बैंक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे और ग्राहक की सहमति अनिवार्य होगी।