सुप्रीम कोर्ट ने 22 साल से गलत तरीके से जेल में बंद एक व्यक्ति को बरी करने का आदेश दिया है, जिसे ट्रायल कोर्ट ने गलत सबूतों के आधार पर दोषी ठहराया था।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने माना कि हाई कोर्ट ने 3,157 दिन की देरी को माफ न करके याचिकाकर्ता के साथ अन्याय किया और उसे 10 साल अतिरिक्त जेल में बिताने पड़े।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को गरीबों और जेल में बंद कैदियों के प्रति उदार और सक्रिय रवैया अपनाना चाहिए ताकि उन्हें मेरिट के आधार पर सुनवाई का मौका मिल सके।