बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने के फैसले के बाद माफी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि BCI को छात्रों को वकील के तौर पर रजिस्टर करने या उन पर सजात्मक कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
मनन मिश्रा ने खुद स्वीकार किया है कि BCI कानूनी शिक्षा के मानकों को बनाए रखने में विफल रहा है और देश में 35-40% वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां हैं।