
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2022 के उस कानून को असंवैधानिक करार दिया जिसके तहत एससी और एसटी आरक्षण बढ़ाया गया था।
अदालत ने कहा कि इस बढ़ोतरी से कुल आरक्षण 56 प्रतिशत हो गया था, जो 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन है।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार के इस कदम को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है।