
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मान्यता प्राप्त 'इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर' एक व्यवहार संबंधी लत है, जिसमें व्यक्ति गेमिंग पर अपना नियंत्रण खो देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गेमिंग के कारण पढ़ाई, नींद और खान-पान जैसी दिनचर्या प्रभावित होने लगे और गेम न खेलने पर चिड़चिड़ापन हो, तो यह लत का संकेत है।
गेमिंग डिसऑर्डर में 'टॉलरेंस' बढ़ने से व्यक्ति को समान संतुष्टि के लिए अधिक समय तक स्क्रीन पर रहना पड़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।