
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण लगातार चार दिनों की गिरावट में निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी 10-साल के बॉन्ड की यील्ड 2007 के बाद पहली बार 5% के पार पहुंच गई है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की मांग का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है, जिससे बढ़ती कीमतों के चलते अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।