
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है, जब तक कि कोई असाधारण आधार न हो।
कोर्ट ने इन घोटालों को बुजुर्गों के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध करार दिया है और इसे लूट व डकैती के बराबर माना जाना चाहिए।
सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल किसी भी आरोपी को राहत देने के पक्ष में नहीं है।