
भारतीय रिजर्व बैंक के सितंबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बैंकों के कर्ज बांटने की रफ्तार जमा रकम से अधिक रही है जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 80% से ऊपर पहुंच गया है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि केवल 80 प्रतिशत से अधिक क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात होने का मतलब यह नहीं है कि बैंक किसी वित्तीय संकट या फंड की कमी का सामना कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि कर्ज देने या निवेश करने की प्रक्रिया के दौरान भी नई जमा राशि सृजित हो सकती है, इसलिए हर बार कर्ज के लिए पूर्व-जमा जुटाना जरूरी नहीं होता।