तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने संकेत दिया है कि मिस्र 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' में शामिल हो सकता है, जिसमें पहले से पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शामिल हैं।
यह समझौता NATO के अनुच्छेद 5 की तरह सामूहिक रक्षा की गारंटी देता है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला होने पर सभी देश सैन्य कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।
मिस्र का इस गुट में शामिल होना भारत के लिए रणनीतिक झटका हो सकता है, क्योंकि यह स्वेज नहर के जरिए भारत के पश्चिमी व्यापार मार्गों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।